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एक और बैंक पर संकट! RBI ने इस सहकारी बैंक से पैसे निकालने पर लगाई रोक

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने महाराष्ट्र के जालना जिले में मंता अर्बन कोऑपरेटिव बैंक पर पैसों के भुगतान और कर्ज के लेनदेन को लेकर छह माह के लिए पाबंदी लगा दी है। मंगलवार को ही केंद्र सरकार ने तमिलनाडु के प्राइवेट सेक्‍टर के लक्ष्‍मी विलास बैंक पर एक महीने के लिए कई तरह की पाबंदियां लगाई हैं।

मंता अर्बन कोऑपरेटिव बैंक के बारे में आरबीआई ने मंगलवार को एक विज्ञप्ति में बताया कि उसने इस बैंक को कुछ निर्देश दिए हैं, जो 17 नवंबर 2020 को बैंक बंद होने के बाद से छह माह तक प्रभावी होंगे। इन निर्देशों के अनुसार, यह बैंक आरबीआई की अनुमति के बिना कोई कर्ज या उधार नहीं दे सकेगा और न ही पुराने कर्जों का नवीनीकरण तथा कोई निवेश कर सकेगा। बैंक पर नई जमा राशि स्वीकार करने पर भी पाबंदी लगा दी गयी है। वह कोई भुगतान भी नहीं कर सकेगा और ना ही भुगतान करने का कोई समझौता कर सकेगा।

इससे पहले केंद्र सरकार ने तमिलनाडु के प्राइवेट सेक्‍टर के लक्ष्‍मी विलास बैंक (Lakshmi Vilas Bank) पर एक महीने के लिए कई तरह की पाबंदियां लगा दी हैं। सरकार ने बैंक के बोर्ड को सुपरसीड कर दिया गया है और निकासी की सीमा (Withdrawal Limit) तय कर दी है। ग्राहक अब 16 दिसंबर तक बैंक से अधिकतम 25 हजार रुपये की ही निकासी कर सकेंगे। सरकार ने रिजर्व बैंक की सलाह पर यह कदम उठाया है।

कुछ महीने पहले बैंक के शेयरधारकों की Annual General Meeting में वोट के आधार पर बैंक के एमडी सीईओ समेत 7 निदेशकों को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया था। बैंक काफी समय से पूंजी संकट से जूझ रहा था और इसके लिए अच्छे निवेशकों की तलाश की जा रही थी। आकड़ों के मुताबिक जून तिमाही में बैंक के पास कुल जमा पूंजी 21,161 करोड़ रुपये थी।

आरबीआई ने हाल में इस बैंक का जिम्मा अपने हाथ में ले लिया था। बैंक के संचालन के लिए RBI ने तीन सदस्यीय कमिटी का गठन किया था। इससे पहले यस बैंक में नकदी संकट बढ़ने पर भी आरबीआई के निर्देश पर एसबीआई के पूर्व अधिकारी को संचालन का जिम्मा सौंपा गया था। आरबीआई ने 27 सितंबर को सीओडी को नियुक्त किया था। इसमें तीन स्वतंत्र निदेशक मीता मखान, शक्ति सिन्हा और सतीश कुमार कालरा शामिल हैं।

लक्ष्मी विलास बैंक पर एक महीने की पाबंदी, 25,000 रुपये से अधिक नहीं निकाल सकेंगे ग्राहक

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