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बिहार चुनाव 2020: 43 वर्षों में सबसे करीबी मुकाबला, इस मामले में NDA और महागठबंधन लगभग बराबरी पर रहे

बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में मुकाबला करीबी रहा। 243 सदस्यीय बिहार विधानसभा में नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (एनडीए) 125 सीटों के साथ कांटों के मुकाबले में बहुमत पाने में कामयाब रहा। हालांकि दोनों गठबंधनों का वोट शेयर एनडीए के लिए 37.3% और महागठबंधन के लिए 37.2% लगभग समान है। अक्टूबर 2005 के चुनावों में जब एनडीए के 143 विधायक थे के बाद सत्तारूढ़ गठबंधन के लिए यह सबसे छोटा बहुमत है। 2010 और 2015 के चुनावों में एनडीए 206 और महागठबंधन 178 सीटों के साथ भारी जीत हासिल की थी। एक एचटी विश्लेषण से पता चलता है कि 2020 के चुनाव राज्य में 1977 के बाद से सबसे करीबी हो सकते हैं।

काउंटिंग की प्रक्रिया सबसे लंबी रही
इस बार यानी 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में काउंटिंग की प्रक्रिया अब तक सबसे लंबी रही। दरअसल इस बार कोरोना महामारी के चलते इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों और बूथों की संख्या में वृद्धि के कारण गिनती की देर तक चली। यही वजह है कि बहुत कम मार्जिन की रिपोर्ट आ रही थी। अंतिम परिणामों के विश्लेषण से पता चलता है कि 1977 के बाद से इसबार चुनावों में विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों में जीत का मार्जिन मतदान के 2 प्रतिशत तक या उससे नीचे था।

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1977 के शुरुआती दौर का चुनाव का डेटाबेस
बिहार चुनाव के लिए 1977 के शुरुआती दौर चुनाव के राजनीतिक डेटा के डेटाबेस के लिए त्रिवेदी केंद्र का उपयोग करना संभव है। इस विश्लेषण में उन विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों को शामिल किया गया है जिसे 2000 में बिहार से बाहर झारखंड राज्य बनाने के लिए उकेरा गया था। इसमें न केवल 2020 के चुनावों में सबसे कम जीत वाले मार्जिन वाले विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों  की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा है बल्कि 20 प्रतिशत से अधिक मतदान वाले मार्जिन वाले विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों की हिस्सेदारी सबसे कम है।

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विधानसभा चुनावों में दूसरा सबसे कम अंतर
अक्टूबर 2005 के चुनाव की तुलना 7.56% में 2020 के चुनावों में जीत का अंतर 8.05 प्रतिशत है और ये 1977 के बाद से बिहार के सभी विधानसभा चुनावों में दूसरा सबसे कम अंतर है।  अगर उम्मीदवारों को मिले वोटों की संख्या के आधार पर तुलना की जाए तो यह अक्टूबर 2005 के चुनाव के बहुत करीब है। अक्टूबर 2005 के चुनावों में 500, 1000 और 2000 वोटों के अंतर से हार जीत का अंतर वाले विधानसभा क्षेत्रों की संख्या 10, 21 और 40 है। वहीं 2020 के चुनावों में ये संख्या क्रमशः 7, 11 और 23 है। हालाँकि, विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों और चुनावों में मिले वोटों की अलग अलग संख्याओं की तुलनाएँ हमें इस बारे में बहुत कम बताती हैं कि विधानसभा क्षेत्रों में प्रतियोगिता कितनी करीबी थी। अक्टूबर 2005 के चुनावों में प्रति विधानसभा क्षेत्रों में वोटों की औसत संख्या 96925 थी जो इस बार बढ़कर 173406 हो गई है।

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दोनों गठबंधन करीबी मुकाबले में हार गए
भले ही बिहार चुनाव 2020 इस बार बारीकी से लड़े गए लेकिन करीबी मुकाबले में दोनों ही गठबंधन के नेता हारे। एनडीए और महागठबंधन ने 20 और 18 ऐसे विधानसभा क्षेत्रों में जीत हासिल की जिसमें हार-जीत में 2 प्रतिशत से भी कम वोटों का मार्जिन था। 20 प्रतिशत से अधिक मार्जिन श्रेणी वाली जीत में महागठबंधन के पास जीत का थोड़ा बड़ा हिस्सा है, जबकि NDA के पास 5% -10 प्रतिशत मार्जिन वाली जीत का सबसे बड़ा हिस्सा है।

जदयू और कांग्रेस ने करीबी मुकाबलों की जीत हासिल की
गठबंधन के भीतर कांग्रेस और जदयू के पास राजद-वाम दलों और भाजपा की तुलना में करीबी चुनावों में जीत का बड़ा हिस्सा है। भाजपा को छोड़कर अन्य तीन प्रमुख दलों (जीती गई सीटों की संख्या के क्रम में) आरजेडी, जदयू और कांग्रेस ने 2015 के विधानसभा चुनावों की तुलना में करीबी मुकाबलों की जीत हासिल की। जबकि CPI-ML ने इस बार 12 विधानसभा क्षेत्रों में जीत हासिल की हैं, जबकि पिछली विधानसभा में उसके मात्र तीन विधायक थे। यही कारण है कि इसे इस तुलना से बाहर रखा गया है।  2015 के चुनाव की तुलना में इस बार दोनों अलग- अलग गठबंधनों के साथ मिलकर लड़े गए थे। सबसे कम और सबसे अधिक जीत वाले मार्जिन वाले विधानसभा क्षेत्र हिलसा (0.01%) और अगिआंव (34.53%) हैं, जहां जनता दल युनाइटेड  (JDU) और सीपीआई-एमएल (CPI-ML) विजयी हुए।

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