Press "Enter" to skip to content

International Yoga Day 2021 yoga and meditation is good for dimentia treatment pur– News18 Hindi

International Yoga Day 2021: 60 साल से अधिक उम्र के लोगों को स्वस्थ रहने के लिए योग और मेडिटेशन की मदद लेनी चाहिए. इस उम्र में कई बुजुर्ग लोगों को संज्ञानात्मक नुकसान (माइल्ड कॉगनिटिव इम्पेयरमेंट MCI) देखने को मिलता है जिसकी वजह से डिमेंशिया (Dementia) या मनोभ्रंश बीमारी विकसित होने का जोखिम काफी अधिक होता है. इस बीमारी के इलाज के लिए लोग सही दवाइयां तो जरूर लेते हैं लेकिन कई हद तक इसमें योग और मेडिटेशन भी मदद कर सकती है. योग और मेडिटेशन का डिमेंशिया पर अच्छा असर दिखाई देता है.

तनाव से निपटने के लिए जरूरी

योग और मेडिटेशन तनाव से निपटने के लिए बहुत ही जरूरी है. मेडिकलन्यूजटूडे की खबर के अनुसार नर्वस सिस्टम से जुड़े अध्ययनों से पता चलता है कि मन और शरीर के अभ्यास का बुजुर्ग लोगों की संज्ञानात्मक वृद्धि, विचार प्रक्रिया में सुधार, तनाव से निपटने और उनके व्यवहार में महत्वपूर्ण फायदा देखने को मिलता है. योग की मदद से कई तरह की रोगों से छुटकारा मिलता है.

इसे भी पढ़ेंः International Yoga Day 2021: जानें योग करने से पहले और बाद में क्या खाना चाहिए और क्या नहीं, डाइट का रखें ध्यान

कुंडलिनी योग और मेमोरी बढ़ाने के लिए मेडिटेशन

कुंडलिनी योग और मेडिटेशन मेमोरी को बेहतर बनाने में मददगार है. वहीं कुंडलिनी योग की मदद से व्यक्ति के मूड और कामकाज में भी सुधार देखने को मिलता है. यह डिमेंशिया की रोकथाम में योग के स्पष्ट महत्व को दर्शाता है. कीर्तन क्रिया जिसमें मंत्रों का जाप किया जाता है, यह भी बुजुर्गों के संज्ञान और मेमोरी को बेहतर बनाने में प्रभावी है.

योग और मेडिटेशन कैसे काम करता है

योग की वैकल्पिक मुद्राएं और मंत्रों के जाप से मौखिक और दृष्टि संबंधी कुशलता के साथ-साथ ध्यान और जागरूकता को भी बढ़ावा मिलता है. यह तंत्रिका संचरण (Neural Transmission) में सुधार करता है और नर्वस सर्किट में लंबे स्तर पर बदलाव का कारण बनता है. योग और मेडिटेशन की मदद से नींद की क्वॉलिटी भी बेहतर होती है और डिप्रेशन के लक्षणों को कंट्रोल करने में भी मदद मिलती है.आज के समय में तनाव, हमारे जीवन का हिस्सा बन गया है. तनाव, स्ट्रेस हॉर्मोन कोर्टिसोल के स्तर को बढ़ाता है और सहानुभूति से जुड़ी अतिसक्रियता मस्तिष्क में मौजूद हिप्पोकैम्पल सर्किट (स्मृति स्थल) को नुकसान पहुंचाती है. तनाव की वजह से इन्फ्लेमेशन, ऑक्सिडेटिव स्ट्रेस, हाइपरटेंशन, नींद में बाधा आना और डायबिटीज जैसी समस्याएं हो सकती हैं और ये सभी फैक्टर्स डिमेंशिया बीमारी के खतरनाक कारक हैं.

मेडिटेशन से तनाव कम होता है

यह देखने में आया है कि ब्रेन के हाइपोथैलमस में विशिष्ट बिंदुओं की उत्तेजना, ब्रेन में तनाव-प्रेरित कोर्टिसोल की वजह से होने वाले नुकसान को कम कर सकती है. साथ ही यह अत्यधिक उत्तेजना के प्रभाव को कम करता है और आराम करने का कारण बनता है, नींद को बढ़ावा देता है और इस तरह से नर्वस सिस्टम की मरम्मत करने में मदद करता है. मेडिटेशन ब्रेन को एक ऐसी स्थिति में डाल देता है जो ऑक्सिडेटिव डैमेज के साथ-साथ नर्व्स में होने वाले इन्फ्लेमेशन को भी कम करता है जिससे ब्रेन को होने वाला नुकसान भी कम होता है.

इसे भी पढ़ेंः International Yoga Day 2021: महिलाओं के लिए बेहद ख़ास हैं ये योगासन, पीरियड्स के दर्द से दिलाएंगे निज़ात

योग और मेडिटेशन के फायदे और इसे कैसे करें

कीर्तन क्रिया या सक्रिय ध्यान, एसटाइल्कोलाइन जैसे ट्रांसमीटर्स के स्तर को बढ़ाकर न्यूरोट्रांसमीटर के गलत तरीके से काम करने की प्रक्रिया को सही करने में मदद करता है. वहीं, योग सिनैप्टिक डिसफंक्शन में सुधार करता है जो डिमेंशिया की एक क्लासिक विशेषता है. ऐसे में योग और मेडिटेशन डिमेंशिया के इलाज और रोकथाम में मददगार है. दूसरी ओर योग और मेडिटेशन आसानी से उपलब्ध है जिसे हर कोई कर सकता है. बीमारी से जुड़ी जो दवाएं आप ले रहे हैं उस पर भी योग या मेडिटेशन का कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता है. लिहाजा योग और मेडिटेशन, डिमेंशिया की रोकथाम में मददगार साबित हो सकते हैं.

More from science & healthMore posts in science & health »

Be First to Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *